अध्याय 177

हमारी ज़िंदगी फिर से सुकून में लौट आई थी।

मैं अभी- अभी शैडो सर्किट स्टूडियो में कुछ नए प्रोजेक्ट ऑर्डर्स संभालने गई ही थी कि लिलियाना का फ़ोन आ गया।

“सोफ़िया, मुझे तुमसे कुछ कहना है।” उसका लहजा आज अलग था—पहले जैसा उत्साह नहीं, बल्कि थोड़ी झिझक।

मैं बात करते हुए भी काम करती रही। “कहो।”

“मैं... मै...

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